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Published On:11 February 2011
Posted by Indian Muslim Observer

माशा अल्लाह! माशा के क्या कहने

दस्तक
 
चेन्नई की मासूम माशा नजीम ने बनाया ऐसा सीलमेकर, जिसे सरकारी कार्यालयों में सील लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

तमिलनाडु सरकार ने माशा को सीलमेकर पर दस हजार का नकद इनाम देकर सम्मानित किया। केरल और गुजरात सरकार ने आश्वस्त किया है कि उसकी खोज को विभिन्न विभागों में इस्तेमाल किया जाएगा।

चेन्नई के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ रही 18 वर्षीय माशा नजीम ने एक ऐसे सील मेकर की खोज की है, जिसे सरकार ने अप्रूव कर दिया है। माशा के इस आविष्कार को जल्द ही सरकार कार्यालयों में सील लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

चाहे प्रधानमंत्री कार्यालय के कागजात हो या फिर बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियां। गोपनीयता बरकरार रखने के लिए रेड वेक्स सील सबसे अहम होती है। लेकिन सील लगाने की प्रक्रिया में अगर छोटी-सी असावधानी रह जाए और इन कागजों में आग लग जाए तो इसकी भरपाई कर पाना नामुमकिन है। ऐसा ही कुछ नजीम के साथ भी घटित हुआ। नजीम बताती हैं कि जब वह दसवीं कक्षा में थी, तभी उसे एक पत्र मिला जिसमें लिखा था कि उसकी उत्तर पुस्तिका जल गई है। हालांकि उसे दुबारा परीक्षा में तो नहीं बैठना पड़ा और टोकन अंक मिल गए, लेकिन तभी उसने ठान लिया था कि वह किसी और के साथ ऐसा नहीं होने देगी। इसके बाद माशा ने अपने दृढ़ निश्चय को हकीकत में बदलते हुए यह मशीन बना दी। उसे पता चला कि उसकी कॉपियां उस वक्त जलीं, जब इन पर सील लगाई जा रही थी। इसके बाद उसने अपने पापा के ऑफिस में देखा कि सरकारी तौर पर अभी भी सील लगाने के लिए परंपरागत तरीके का इस्तेमाल होता है। इसे देखकर वह बहुत दुखी हुई। उसने ठान लिया कि जिस पीड़ा से वह खुद गुजरी है, किसी और के साथ ऐसा नहीं होने देगी।

माशा की इस खोज में सील लगाने के लिए आग का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह विद्युत के ऊष्मीय सिद्धांत पर आधारित है। माशा बताती हैं कि इसमें लाख के बहाव को यूजर कंट्रोल कर सकता है। इसमें जो पदार्थ इस्तेमाल होता है, वह १६० डिग्री सेंटीग्रेड पर पिघलता है। यह सीलमेकर सरकार के सभी नियमों पर पूरी तरह से खरा उतरता है।

ऐसे करता है काम

इस्तेमाल करने के लिए मशीन को बिजली के प्लग में लगाया जाता है। वेक्स स्टिक को मशीन में रखते हैं और बस तीन से चार मिनट में यह सील बनकर तैयार हो जाती है। सीलमेकर के भीतर एक बॉयलर लगा होता है, जो इसे गर्म कर देता है तब वेक्स स्टिक पर लगी वेक्स पिघलने लगती है और सही तरीके से पेपर सील पर फैल जाती है।

यह मशीन बेहद हल्की है और आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाई जा सकती है। इसे एक हाथ से भी हैंडल किया जा सकता है। माशा का यह फ्लैमलैस सीलमेकर जल्द ही सरकार के कामकाज के तरीके को बदल देगा। माशा को इस आविष्कार के लिए कई जगह पुरस्कृत किया जा चुका है।

यह तो शुरुआत हैमाशा की मंजिल यहीं पर खत्म नहीं होती, बल्कि यह उसके रास्तों की शुरुआत है। माशा फिलहाल इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में पढ़ाई कर रही है और रिसर्चर बनना चाहती है। इसके अलावा माशा ने ट्रेन के लिए हाईजीनिक ड्रेनेज सिस्टम का विकास किया है। इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी सराहना की। इस प्रोजेक्ट को जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय बाल विज्ञान प्रदर्शनी में प्रथम स्थान भी मिल चुका है। Link

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