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Published On:27 October 2010
Posted by Indian Muslim Observer

क्या ग़रीबों और मज़्लोमों के अधिकारों की बात करने का मतलब देश दरोही होना है? सरकार से अरुंधति रॉय का सवाल

अरुंधति का बयान

"मैं यह श्रीनगर से लिख रही हूं। आज के अखबार कह रहे हैं कि कश्मीर में दिए गए बयानों के लिए मुझे देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया जा सकता है। मैंने सिर्फ वही कहा है जो कश्मीर के लाखों लोग रोजाना कहते हैं। मैंने सिर्फ वहीं कहा है जो मैं और मुझ जैसे सैंकड़ों लेखक सालों से लिखते और कहते रहे हैं। वो लोग जिन्हें मेरे भाषणों को पढ़ने की फिक्र है जान जाएंगे कि मेरे शब्द सिर्फ न्याय की मांग है।''

मैंने कश्मीर के उन लोगों की बात कि है जो दुनिया में सेना के सबसे खौफनाक शासन में जी रहे हैं। मैंने कश्मीर के उन पंडितों की बात की है जो अपने जन्मस्थान से खदेड़ दिए जाने के बाद बेबसी का जीवन जी रहे हैं। मैंने कश्मीर में शहीद हुए उन दलित सिपाहियों की बात की हैं जिनकी कब्रें कूड़े पर बनाई गई हैं। मैंने कुड्डालोर में इन शहीदों के गांव की यात्रा की है और इनकी कब्रों की दुर्दशा देखी है। मैंने भारत के उन गरीब लोगों की बात की है जो कश्मीमिरी मुस्लमान होने की कीमत चुका रहे हैं और जो अब आतंक के साये में जीना सीख रहे हैं।

कल मैंने सोपियां की यात्रा की। दक्षिण कश्मीर में सेब उगाने वाला यह कस्बा पिछले साल आशिया और नीलोफर के रेप और कत्ल के बाद 47 दिन तक बंद रहा था। इन युवतियों के शव घर के करीब एक नाले में मिले थे। आज तक उनके कातिलों को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका है। मैंने निलोफर के पति और आशिया के भाई शकील से मुलाकात की। हमारे चारों तरफ खड़े लोगों की आंखों में गुस्सा और दुख साफ देखा जा सकता था। ये लोग न्याय मिलने की उम्मीद खो चुके हैं। मैं उन युवा पत्थरबाजों से भी मिली जिनकी आंखों के सामने गोलियां बरसती हैं। मैंने एक युवक के साथ यात्रा की जिसने मुझे बताया कि अनंतनाग जिले के उसके तीन किशोर दोस्तों को हिरासत में लिया गया और उनकी अंगुलियों के नाखून खींच लिए गए। पत्थर फेंकने की सजा देने के लिए।

अखबारों में कुछ लोगों ने मेरे खिलाफ लिखते हुए मुझ पर नफरत भरे भाषण देकर भारत को तोड़ने का आरोप लगाया है। लेकिन मैंने जो कहा है वो प्यार और सम्मान से लिखा है। ये मैंने इसलिए कहा है क्योंकि मैं नहीं चाहती की लोगों की हत्या हो, लड़कियों का बलात्कार हो, युवकों को हिरासत में लेकर उनके नाखून खींच लिए जाए। यह मैंने इसलिए कहा क्योंकि मैं ऐसा समाज चाहती हूं जो खुद को एक कह सके। शर्म है ऐसे राष्ट्र पर जिसे अपने लेखकों की आवाज बंद करनी पडे़। धिक्कार है ऐसे देश पर जहां न्याय की मांग करने वालों को जेल में ठूसने की धमकी दी जाती है जबकि धर्म के नाम पर हत्याएं करने वाले, घोटाले करने वाले, लुटेरे, बलात्कारी और गरीबों की खाल खींचकर अमीर बनने वाले खुलेआम घूमते हैं।''

अरुंधति रॉय
26 अक्टूबर
श्रीनगर

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Posted by Indian Muslim Observer on October 27, 2010. Filed under . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Feel free to leave a response

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1 comments for "क्या ग़रीबों और मज़्लोमों के अधिकारों की बात करने का मतलब देश दरोही होना है? सरकार से अरुंधति रॉय का सवाल"

  1. Arundhti Roy waqayee mazloomo ke haq mein bol rahi hain. Jis waqt sarkaar, media, communal log aur police kashmiriyo ke khilaaf bol rahe hon wahan unke sath khare rehna bari baat hai, aur unke haq mein itni buland awaaz rehna hi bari baat hai.

    Allah unko hidayat de

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